23 फ़रवरी 2009

हमारी ''मर्यादा''

इस लेख को लिखा है मेरे मित्र 'कुंदन कलश' ने। कुंदन हैं तो पत्रकारिता जगत के ही चेहरे पर इस चेहरे के पीछे एक संवेदनशील और भावुक दिल भी धड़कता है जो इस लेख से साफ़ ज़ाहिर होता है। कुंदन ६/७ सालों से मीडिया से जुड़े हैं। इन्होने अपने करियर की शुरुआत जी नेटवर्क से की और आज हमारे संस्थान के प्रमुख सदस्यों में से हैं। मीडिया में अपना योगदान कुंदन विडियो एडिटर और साउंड इंजीनियर के तौर पर दे रहे हैं।
कुंदन अपने करियर को नई ऊंचाई पर ले जायें हम सब यही दुआ करते हैं।
राजीव करूणानिधि


हमारी ''मर्यादा''


जब सीता ने लक्ष्मण रेखा लांघी तो मायावी रावण आया। एक वादा सीता ने तोडा लक्ष्मण से, वजह अपनी भावनाओ पर सीता का वश नही रहा। नतीजा सामने था। लक्ष्मण ने तो मर्यादा की रेखा खींच रखी थी पर सीता नही रुकी। ऐसा नही था कि सीता नादान थी, नासमझ थी, या फ़िर उसे पता ही नही था कि लक्ष्मण रेखा लांघने का क्या अंजाम होगा। वैसे जब भी लक्ष्मण रेखा की मर्यादा तोडी जाती है मायावी रावण सामने खड़ा मिलता है, हाँ सिर्फ़ स्वरुप बदला रहता है।
एक ऐसा ही मायावी रावन ऍम ऍम एस के रूप में इन दिनों अक्सर सामने आ जाया करता है। हाल में ही एक निजी टीवी चैनल पर ऐसा ही ऍम ऍम एस प्रकरण सामने आया है। एक अबला का छल से ऍम ऍम एस बना लिया गया, मीडिया में खलबली मच गई। मामले को दबाने के बजाय टी आर पी कमाने का हथकंडा बना दिया गया। दुशासन मीडिया परत दर परत उसे नंगा करती जा रही है।
समझ में नहीं आता कि मीडिया इस खबर को दिखा कर समाज को किस ओर ले जा रही है। जिस खबर को दो मिनट से ज्यादा तरजीह नहीं दी जा सकती उसे पूरे दो दिनों तक तड़का मार के दिखाया जा रहा है। मीडिया की हर ख़बर समाज को प्रभावित करती है।
देखा जाये तो इस तरह की हरकतों के खिलाफ़ आवाज़ उठाना गलत नहीं है पर किसी के व्यक्तिगत जीवन को परदे पर लाना निहायत ही गलत है। इसे रोका तो नहीं जा सकता पर दिखाने के पैमाने ज़रूर तय किय जा सकते हैं। ऐसे ही हर भारतीय नारी को अपनी भावनाए जाहिर करने का हक़ है पर ऍम ऍम एस रुपी रावण से बचने के लिये हर नारी को अपनी मर्यादा भी तय करनी होगी। नहीं तो कभी रावण, तो कभी दुशासन मीडिया इसे हर बार नंगा करेगी।
मै अपनी अभिव्यक्ति को सिर्फ़ पन्नो में नहीं रखना चाहता। मेरा अनुरोध है उन सभी लोगों से, कृपया समाज और अपनी संस्कृति की मर्यादा की रक्षा के लिये हर ज़रूरी कदम उठायें, ताकि फिर कोई दुबारा ऍम ऍम एस का शिकार न हो पाए। मीडिया वालों को भी ऐसी ख़बर परोसने के बजाय अपना दायरा समझना चाहिए। किसी की बहु बेटी को बाजारू बनाने से पहले एक बार अपनी माँ को भी याद करना चाहिए।

22 टिप्‍पणियां:

hem pandey ने कहा…

मीडिया का गैरजिम्मेदारना रोल इससे पहले भी कई बार देखा जा चुका है.

विष्णु बैरागी ने कहा…

यदि आप इलेक्‍ट्रानिक मीडिया में है और यह सब लिख रहे हैं तो उम्‍मीद बंधती है कि 'अपने पेशे की काली भेडों का निकालने की प्रतीक्षित शुरुआत' कर रहे हैं।
सुधार की कोई भी शुरुआत अपने घर से ही होती है। उम्‍मीद करे कि आप इसके हरावल दस्‍ते के नायक हों।

राज भाटिय़ा ने कहा…

राजीव भाई किसी को भी अधिकार नही किसी की निजी जिण्दगी को सार्वजनिक करने का, इस के लिये वो इन इलेक्‍ट्रानिक मीडिया पर अपनी मान हानि का मुकदमा कर के हरजाने के साथ साथ इन्हे सबक भी सीखा सकती है, लेकिन भारत मै अब्बल तो आम आदमी को इस के बारे पता नही, दुसरा एक शरीफ़ आदमी इन झगडो मे पडना नही चाहता, ओर यही हमारी गलती है
मुझे प्रा मामला तो नही पता, लेकिन आप के लेख से जितना मालूल हुआ, उसी के हिसाब से मेने यह टिपण्णी दी.
धन्यवाद

संगीता पुरी ने कहा…

आपकी चिंता सही है...महा शिव रात्रि की बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं..

shyam kori 'uday' ने कहा…

... प्रभावशाली व संवेदनशील अभिव्यक्ति है, हर किसी को अमल मे लाना चाहिये।

समीर सृज़न ने कहा…

हाल में ही एक निजी टीवी चैनल पर ऐसा ही ऍम ऍम एस प्रकरण सामने आया है। एक अबला का छल से ऍम ऍम एस बना लिया गया, मीडिया में खलबली मच गई। मामले को दबाने के बजाय टी आर पी कमाने का हथकंडा बना दिया गया। दुशासन मीडिया परत दर परत उसे नंगा करती जा रही है।

इस तरह के सकारात्मक विचार के लिए कुंदन जी के साथ आपको बधाई...मीडिया का आदमी होने के नाते मैं कतई नहीं चाहूँगा की मीडिया में येल्लो जर्नलिज्म हावी हो खासकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में..हमें खुद ही इसे रोकने के सार्थक प्रयास करना चाहिए वरना आने वाले वक्त में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की विश्वसनीयता खतरों मे आ जाएगी...

अखिलेश सिंह ने कहा…

ऍम ऍम एस बनाने वाला जितना बड़ा दोषी है, उतने ही बड़े गुनाहगार इलेक्ट्रोनिक मीडिया के वे लोग भी हैं जिन्होंने सिर्फ टीआरपी के लिए ऍम ऍम एस टीवी पर दिखा दिया... जहाँ तक मुझे पता है टीवी चैनलों के संपादक इस खबर को दिखाना नहीं चाहते थे, लेकिन एक टीवी चैनल ने अपने फायदे के लिए इसे प्रसारित करवा दिया,
लड़कियों को भी अपनी सीमायें तय कर लेनी चाहिए.....
कुंदन कलश जी की चिंता जायज़ है...

राजीव करूणानिधि ने कहा…

कुंदन जी बहुत ही संवेदनशील बातें कही है, पर आपने एक अहम् मुद्दे पर बात किये बगैर लेख को समाप्त कर दिया. मर्यादा की बात करना ज़रूरी है पर उससे भी ज्यादा ज़रूरी है दोषी को सजा दिलाना. इस पूरे प्रकरण का सबसे बड़ा गुनाहगार वो लड़का है जिसने इस लड़की को धोखा दिया. सम्बन्ध बनाना और उसकी तस्वीर उतरना कही से भी गलत नहीं है अगर आप बालिग है तो. पर मोहब्बत के नाम पर किसी से खिलवाड़ करना ज़ुल्म ज़रूर है. जिस किसी ने भी विश्वास की आड़ में इस लड़की से रिश्ता बनाया और उसकी फिल्म बना कर बाज़ार में बेचा उस कमबख्त को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए.

नीरज गोस्वामी ने कहा…

कुंदन जी मैं राजीव जी की बात से सहमत हूँ...दोषी को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में भोली भाली लड़कियों का यूँ सार्वजनिक शोषण रोका जा सके...टी.वी. के चेनल प्रतिस्पर्धा में जो दिखा दें कम है...पैसे और टी.आर.पी के सामने नैतिकता को कौन पूछता है...

नीरज

डॉ .अनुराग ने कहा…

बहुत सारे पत्रकारों के ब्लॉग पढ़े है ....दुःख इस बात का होता है कुंदन सभी पत्रकार ब्लोग्स पर अक्सर वही लिखते है जो उनके जमीर की आवाज होती है पर ऐसा क्यों है चैनल तक पहुँचते पहुँचते वो दब जाती है ?

Dilip ने कहा…

वाह कुंदन जी आपने तो गजब का आलेख लिखा है..मीडिया में मेरी रूचि कम है फिर भी इस तरह की चीजों को हवा देना मीडिया के लिए कही से अच्छा नहीं है...बधाई..

kundan ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
kundan ने कहा…

नीरज जी,अनुराग जी आपकी बातों से मैं भी सहमत हू ,लकिन मेरा मकसद उन नारीओं को भी सचेत करना है जो इस तरह के छल का शिकार होती है.आप दोनों के कीमती सुझाओ के लिए धन्यवाद...

kumar Dheeraj ने कहा…

अच्छा लेख आपने परोसा है । हर जगह हनन और मयाॆदा तोड़ने की बात चल रही है । बात सीता से लेकर मायाबी मीडिया तक पहुंच गई । आज के जमाने में टीआरपी ने मीडिया को इस कदर बहकाया है कि केवल उसे ब़ाज़ार में उसके सिबा कुछ दिखाई नही देता है । जहां पैसे बनेगी जहां बात बनेगी वही खबर बनेगी । फिर समझ में नही आता है कि बेवजह ख़बर को तरजीह देकर मीडिया क्या दिखलाना चाहता है । बढ़िया लेख शुक्रिया

आकाश सिंह ने कहा…

ऍम ऍम एस रुपी रावण से बचने के लिये हर नारी को अपनी मर्यादा भी तय करनी होगी। नहीं तो कभी रावण, तो कभी दुशासन मीडिया इसे हर बार नंगा करेगी। ये सही कहा है आपने खुद का ख़याल अगर हम रखे तो शायद हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकेगा. मौज मस्ती में हमें अपनी मर्यादा और सीमा का ख्याल रखना चाहिए. बहुत अच्छा लिखा है आपने अगले पोस्ट के इन्तजार में

विनीता यशस्वी ने कहा…

Aapke lekh bahut sanjida hai...

pata nahi media ki aankh kab khulegi...

sandhyagupta ने कहा…

Loktantra ke chauthe stambh ko jis prakar baazar ne gher liya hai woh vaastav me kaphi chinta ka vishay hai.

vimi ने कहा…

bilkul sahi soch hai.we have to draw a line instead of promoting sensational news.

sandhyagupta ने कहा…

होली की हार्दिक शुभकामनाएँ .

Harkirat Haqeer ने कहा…

मै अपनी अभिव्यक्ति को सिर्फ़ पन्नो में नहीं रखना चाहता। मेरा अनुरोध है उन सभी लोगों से, कृपया समाज और अपनी संस्कृति की मर्यादा की रक्षा के लिये हर ज़रूरी कदम उठायें, ताकि फिर कोई दुबारा ऍम ऍम एस का शिकार न हो पाए। मीडिया वालों को भी ऐसी ख़बर परोसने के बजाय अपना दायरा समझना चाहिए। किसी की बहु बेटी को बाजारू बनाने से पहले एक बार अपनी माँ को भी याद करना चाहिए....Rajiv ji aapke vichar jaan kar khusi hui...!!

समीर सृज़न ने कहा…

bahut dino se lagta hai aapne koi nai post nahi likha hai, lagta hai kahin bahar gaye hain.

shama ने कहा…

पहली बार आयी हूँ आपके ब्लॉग पे ... गज़ब विविधता और संजीदगी का अनुभव पाया ..
सही कहा आपने ..'लक्ष्मण रेखा ' कई रूपों में सामने आती है ..सीता तो एक प्रतीक मात्र थी ..हम बाद में सोंचें ,कि , ऐसा न होता तो कैसा होता ..विधी का विधान जब अटल होता है ,तो , नियती भी अटल होती है ..सीता ऐसा न करती तो 'रामायण ' लिखा नही जाता !

कौरव गर पांडवों को केवल ५ ग्राम ही दे देते तो , 'महाभारत ' नही घटता ..!

http://shamasansmaran.blogspot.com

http://aajtakyahantak-thelightbyalonelypath.blogspot.com

http://kavitasbyshama.blogspot.com

http://baagwaanee-thelightbyalonelypath.blogspot.com

http://shama-kahanee.blogspot.com